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पितृ दोष दूर करने के सरल उपाय

Pitra Dosh dur karne ke saral upay

 

ज्योतिष शास्त्रो में पितृ दोष को सबसे बड़ा दोष माना गया है। कहा जाता है की जिस भी जातक की कुंडली में पितृ दोष होता है उसे अपनी जिंदगी में  बहुत से परेशानियों का समना करना  पड़ता है जैसे धन से लेकर मानसिक कलेश तथा परिवार से लेकर कारोबार तक में दिक्क़ते आती है। अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष हो तो जितने जल्दी हो सके ज्योतिष से सलाह लेनी चाहिए और उनके बताये उपाय करने चाहिए वरना आपकी  परेशानिया आपका  कभी पीछा नहीं छोड़ेगी।  बहुत लोगो के साथ यह  समस्या भी होती है की आमतौर पर पितृदोष के लिए खर्चीले उपाय बताए जाते हैं और हो सकता है वह ये उपाय करने में असमर्थ हो तो ऐसे स्तिथि में क्या करे??? तो आप चिंता मत करिये आज हम आपको ऐसे ही कुछ उपाय बताने वाले है जिनके उपाय से पितृ  दोष का प्रभाव काम होगा। वो भी बहुत सरल रूप में और  खर्चा भी बहुत कम होगा |

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माँ काली की नियमित उपासना से भी पितृ दोष में लाभ मिलता है।

सोमवती अमावस्या को दूध की खीर बना, पितरों को अर्पित करने से भी इस दोष में कमी होती है ।

प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन कराने व दक्षिणा वस्त्र भेंट करने से पितृ दोष कम होता है ।

कुंडली में पितृदोष होने से किसी गरीब कन्या का विवाह या उसकी बीमारी में सहायता करने पर भी लाभ मिलता है।

पीपल के वृक्ष पर दोपहर में जल, पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल, काले तिल चढ़ाएं और स्वर्गीय परिजनों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद मांगें।

अपने स्वर्गीय परिजनों की निर्वाण तिथि पर जरूरतमंदों अथवा ब्राह्मणों को भोजन कराए। भोजन में मृतात्मा की पसंद की वस्तु अवश्य बनाएं।

शाम के समय में दीप जलाएं और नाग स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र या रुद्र सूक्त या पितृ स्तोत्र व नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें। इससे भी पितृ दोष की शांति होती है।

कुंडली में पितृ दोष बन रहा हो तब जातक को घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने स्वर्गीय परिजनों का फोटो लगाकर उस पर हार चढ़ाकर रोजाना उनकी पूजा स्तुति करना चाहिए।

सोमवार प्रात:काल में स्नान कर नंगे पैर शिव मंदिर में जाकर आक के 21 पुष्प, कच्ची लस्सी, बिल्वपत्र के साथ शिवजी की पूजा करें। 21 सोमवार करने से पितृदोष का प्रभाव कम होता है।

भोजन बनने पर सर्वप्रथम पित्तरों के नाम की खाने की थाली निकालकर गाय को खिलाने से उस घर पर पित्तरों का सदैव आशीर्वाद रहता है घर के मुखियां को अपनी थाली से पहला ग्रास पित्तरों को नमन करते हुये कौओं के लिये अलग निकालकर उसे खिला देना चाहिए।

 

1 Comment

  • k p gangwar says:

    मेरी माँ की मृत्यु 11 जुलाई 2013 में हुई है ।
    इस साल से मैं उनका श्राद्ध करना चाहता हूँ। plz मुझे बतायें मै माता जी का श्राद्ध किस दिन कर सकता हूँ कौन सा दिन ठीक रहेगा ।

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