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बसंत पंचमी पर करे माँ सरस्वती की आराधना

बसंत पंचमी पर करे माँ सरस्वती की आराधना

तीव्र सफलता हेतु अचूक साधना

आज युवा पीढ़ी स्मार्ट जरनेषन है, स्मार्ट हो भी क्यों ना आज के युग में यदि कोई बच्चा स्मार्ट नहीं है, कम बोलता है, शर्माता है, झिझकता है तो उसके सफल होनें की सम्भावनाएं न्यूनतम रह जाती हैं इसकी अपेक्षा जो बुद्धिमान है, विवेकी है, चतुर है, त्वरित निर्णय लेनें में सक्षम हैं  जो प्रभावी भाषा बोलनें में दक्ष है वही आज अधिक सफल है। वही दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकता है। आज का समय ही ऐसा है कि जो अधिक पढ़े लिखे हैं जिनकी तीव्र स्मरण शक्ति है वही आगे बढ पातें हैं। यदि आप भी अपनें जीवन में कुछ विषेष करना चाहतें है, आगे बढना चाहतें है, सफल जीवन जीना चाहतें हैं तो आपको इस बसन्त पंचमी पर यह अद्भुत, अचूक और प्रभावी साधना अवष्य ही सम्पन्न करनी चाहिए!!

बसन्त पंचमी के दिन सरस्वती सिद्ध कर मंत्र साधना में सिद्धी प्राप्त की जाती है, कण्ठ में सरस्वती को स्थापित किया जाता है और बच्चों की जीभ पर सरस्वती स्थापन्न कर उन्हें शिक्षा ज्ञान और सफलता के क्षेत्र में पूर्णता प्रदान की जाती है।

साधना के लाभ-

इस दिन इस साधना को सम्पन्न करनें से व्यक्ति अच्छा वक्ता बन जाता है, वह जो भी बात कहता है सुननें वाले मंत्र मुग्ध होकर उसके प्रवचन व भाषण सुनतें है। घर के बालकों को यह प्रयोग सम्पन्न करानें से उनका ध्यान पढ़ाई में लगता है, वह जो भी पढ़ता हैं, उसे स्मरण रहता है और परीक्षा में श्रेष्ठ अंक प्राप्त कर उतीर्ण हो पाता है। लोग उसकी बात माननें को एक तरीके से मंत्रचालित हो जातें हैं। इस प्रकार से यह साधना राजनेताओें अधिकारियों एवं उस व्यक्ति के लिए अनुकूल है जो जीवन में सम्मान और यष की आकांक्षा रखता है। इस साधना को सम्पन्न करनें के बाद यदि संगीत और गायन  के क्षेत्र में अभ्यास किया जाये तो त्वरित सफलता मिलती है। कालान्तर में उच्च कोटि का गायक या संगीतकार बनकर उच्च कोटि का जीवन जीता है। जीवन में जब भी किसी प्रकार की द्वन्द्वात्मक स्थिती उत्पन्न होती है, कि क्या करें,  कौनसा मार्ग उचित रहेगा? कौनसा व्यवसाय हमारे जीवन के लिए उचित रहेगा, क्यों हमारे जीवन में बाधाएं आ रही है, तो इन अनेक प्रश्‍नों के उत्तर व्यक्ति को साधना द्वारा उसके भीतर से ही प्राप्त होनें लगतें हैं, यही सरस्वती प्रदत ज्ञान होता है।

यदि आप भी उपरोक्त लाभों को प्राप्त करना चाहतें है तो इस बसन्त पंचमी के दिन इस साधना को अवष्य ही सम्पन्न करें और अपनें जीवन को सफल बनायें। आपके लिए इस दुर्बल एवं अचूक साधना का पूर्ण विधि विधान नीचे दिया जा रहा है।

साधना विधान –

  • बसन्त पंचमी के दिन प्रातः काल साधक जल्दी उठ जाये और स्नान आदि से निवृत होकर वासन्ती या पीले वस्त्र धारण करें
  • फिर घर के किसी स्वच्छ कमरें में या पूजा स्थान में अपनें परिवार के साथ पूर्व दिषा की ओर मुख करके बैठ जाये बैठनें के लिए साधक कुश के आसन्न को उपयोग करे। कुश का आसन्न ना हो तो ऊन का आसन्न ले सकते हैं ।
  • अपनें सामनें लकड़ी के बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाये और उस पर सरस्वती का चित्र स्थापित कर दें।
  • अब बाजोट पर एक थाली रखें तथा उसमें कुकंम से रंगे अक्षत की ढै़री लगायें।
  • अब इस ढेरी पर प्राण प्रतिष्ठित एवं पूर्ण चैतन्यमुक्त सरस्वती यंत्र स्थापित करें।
  • यंत्र का पंचामृत से स्नान करवायें तथा स्वच्छ जल से स्नान करवाकर, पौंछ कर पुनः स्थापित करें।
  • यंत्र को केसर, कुमकुम से तिलक करें। माँ सरस्वती जी के चित्र पर भी तिलक लगायें।
  • अब यंत्र से अष्टगंध से तिलक करें, सरस्वती चित्र पर भी करें और साथ ही समस्त बाल बालिकाओं एवं पूरा में बैठे सभी लोगों का अष्टगंध से तिलक करें ।
  • यंत्र के समीप धूप दीप और अगरबत्ती जलायें, माता पर सफेद पुष्प चढायें।
  • दूध की बनी मिठाई का प्रसाद चढ़ायें।
  • अब माता सरस्वती का ध्यान करें और उसके बाद सरस्वती माला से निम्न मंत्र की 21 माला मंत्र जाप करें।  ।। ऊँ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।।
  • मंत्र जाप की समाप्ति पर आंखे बन्द कर माता सरस्वती से पूर्ण बुद्धि, विवके, स्मरण शक्ति में वृद्धि, वाणी में तेज, आर्कषक व्यक्तित्व आदि की प्रार्थनां करें।
  • अब प्रसाद बच्चों में बांट दे और स्वयं भी खाये। अन्य पूजा सामग्री को पीले वस्त्र में लपेटकर नदी, तालाब, आदि में विसर्जित कर दें। आप चाहें तो सरस्वती यंत्र को अपनें पूजा  घर में स्थापित कर सकतें हैं।

 

इस प्रकार आप उपरोक्त साधना को सम्पन्न कर अपनें बच्चों का भविष्य उज्जवल कर सकतें है । अतः ध्यान रहें यह बसन्त पंचमी यूं ही ना चली जायें।

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